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Friday, March 26, 2021

आनंदपुरी जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान के छठवें दिन सिद्ध भगवान को 256 अर्घ समर्पित






आनंदपुरी जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान के छठवें दिन सिद्ध भगवान को 256 अर्घ समर्पित किये गए। आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ने बताया सच्चे साधु के दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है साधु चेतन तीर्थ कहे गए है तीर्थ का फल  फलान्तर में प्राप्त होगा।किन्तु साधु समागम का फल तुरंत ही प्राप्त होता है। साधु की चर्या में आहार दान देने मात्र से चारो दान का फल प्राप्त होता है। आहार दान देने से दिन भर साधना तप संयम का पालन होता है आहार एक तरह से औषधि का भी कार्य करता है। आहार होता रहेगा तो अभयदान मिलता रहेगा। आहार से ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होता है। इसलिए सब प्रकार के दान में आहार दान सर्वश्रेष्ठ है। साधु को आहार दान से से स्वकल्याण के साथ पर कल्याण भी होता है। एक समय सच्चे साधु के दर्शन बहुत मुश्किल से होते थे। किंतु आज बहुत सुलभ हो गया है। साधु की उचित चर्या देखकर साधु बनने की प्रेरणा मिलती है।  मुनि श्री विशाल सागर भी विधान की क्रिया करा रहे थे भक्तों ने गीत संगीत के साथ भक्ति करी। मुख्य रूप से शीलचंद जैन अनिल जैन पदम जैन महेन्द्र    कटारिया  राजकुमार विजेंद्र अनूप जैन पंडित आगरा से आए राकेश जी एवं सदस्य चक्र विधान में मैना सुंदरी अनिल आशा जैन विवेक कुबेर आभा जैन ईशान इंद्र आदेश सरिता महेंद्र इंद्र विजेंद्र प्रियंका सनत इंद्र सहित काफी तादाद में जैन समुदाय के सदस्य मौजूद रहे।

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