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Saturday, January 30, 2021

अन्तर्मना जन मंगल महोत्सव




मंगल सान्निध्य: भारत गौरव साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज 


अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज कानपुर महानगर के आनंदपुरी कॉलोनी में विशालतम भव्य प्रांगण में जनमंगल महोत्सव में आये हजारों भक्तों को सम्बोधित करते हुए कह रहे थे कि जन मंगल महोत्सव पाप से पुण्य का, अशुभ से शुभ का, कंकर से शंकर, बनने का महोत्सव है। आज हर व्यक्ति परेशान दिख रहे हैं। गृह मैत्री, मन की शान्ति, व्यापार उन्नति का अनुष्ठान है जन मंगल महोत्सव। इस दरमियान उपस्थित भक्त जनों को संबोधित करते हुए आगे बताया कि अर्जन के साथ विसर्जन जरूरी है।अगर संग्रह के साथ त्याग ना किया तो जीवन का संतुलन गड़बड़ा जाएगा। और इससे जीवन, समाज व देश में विसंगतियाँ निर्मित हो जाएगी।जैन धर्म में श्रावकों के लिए आदेश है कि जो कमाओ, उसका दसवाँ हिस्सा दान में निकालो। दान कल्प वृक्ष है।दान का महत्व समझना है तो इसे एक बार करके देखो आज तुम्हारे पास जो है, वह दान की बदौलत ही है। अगर तुम्हारे पास 10 लाख रूपये हैं तो निश्चित मानना, कि कभी तुमने किसी जरूरतमंद को किसी धर्म के कार्य में10 रुपये का दान दिया होगा। अगर आज तुम्हारे पास 10 कमरों का मकान है, तो यकीनन कभी तुमने किसी तीर्थ पर एक कमरा जरूर बनवाया होगा। अगर तुम्हारी थाली में 8 तरह के व्यंजनों की कटोरियाँ हैं, तो निश्चित मानो कि कभी तुमने 8 दिनों से भगवान जिनेंद्र की पूजा अर्चना की होगी। दुनिया का तो रिवाज यही है यहां जो दोगे वही मिलेगा। और दान तो हजार गुना होकर लौटता है। मेरा एक छोटा सा सूत्र है ।इतना दान मत करो कि खुद को किराए के मकान में रहना पड़े। इतना भी संग्रह मत करो, कि बाद में नर्क में जाना पड़े। जितनी शक्ति है, सामर्थ्य है उतना करो। शक्ति का अतिक्रमण भी ना करो। और उसे छुपाओ भी नहीं। सामर्थ्य है, तो दान पुण्य और तीर्थ यात्रा करनी ही चाहिए।आचार्य श्री ने धर्मसभा को आगे कहा कि जीवन केवल धन कमाने के लिये नहीं है। सभा का विशाल आयोजन 01 फरवरी को मातृ वंदना महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

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