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Thursday, January 28, 2021

प्रभु बनना है तो मन को मारना पड़ेगा। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज







अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता आचार्य श्री  प्रसन्न सागर जी महाराज कानपुर महानगर के आनंदपुरी दिगंबर जैन मंदिर के भव्यतम प्रांगण में, विशाल सभा को संबोधित करते हुए कह रहे थे,मनुष्य जीवन दुर्लभ है। अतः जिंदगी के बेश कीमती लम्हे व्यर्थ मत जाने दीजिए। यह जिंदगी अमानत है। सावधान रहिए। चित्त  की चौकसी ही परम ज्योति को पाने  का द्वार है। अभी तुम महज एक पत्थर हो। परमात्मा के घटते ही  सब पत्थर प्रतिमाएं बन जाती हैं। तुम प्रतिमा बन सकते हो। क्योंकि तुम में  प्रभु बनने की प्रतिभा है। प्रभु बनना है, तो मन को मारना पड़ेगा। केवल तन को मारना पर्याप्त नहीं होगा। तन को क्या मारना, वह तो यूं ही मरा हुआ है ,अथवा यूं ही मर जाएगा, मन को मारो। तो कोई बहादुरी है मन को मार कर ही तो कोई वर्धमान महावीर बन जाता है । सिकंदर तरीके विश्व विजेता तो इस पृथ्वी पर बहुत हुए। लेकिन मन के किले पर फतह करने वाले महावीर तो कुछ एक ही है। सिकंदर विश्व विजय का प्रतीक है। तो महावीर आत्म  विजय के प्रतीक है। सिकंदर और महावीर में इतना ही तो अंतर है एक विश्व विजेता है। मगर स्वयं से हारा है ।दूसरा आत्म  विजेता है। मगर विश्व का मसीहा है। जो जाग गया वह महावीर हो गया। जो जाग ना पाया सोए सोए ही जिया वह सिकंदर हो गया। सोया हुआ आदमी सिकंदर ही तो होता है। भारत गौरव आचार्य  प्रसन्न सागर महाराज ने कहा की दुनिया में जितने भी पाप और अपराध हो रहे हैं। वह सब सोए हुए लोगों के द्वारा ही हो रहे हैं। जागा हुआ आदमी कोई पाप नहीं करता। मैं पूछता हूं क्या कोई होश में व्यक्ति किसी को गाली दे सकता हैं क्या किसी का गला घोट सकता है क्या शराब पी सकता है नहीं बिल्कुल नहीं होश में व्यक्ति शराब पी ही नहीं सकता ।लोग कहते हैं, शराब पीने के बाद व्यक्ति  बेहोश हो जाता है लेकिन मैं कहता हूं, कि बेहोश में ही  व्यक्ति शराब पीता है। होश में  शराब पीना संभव ही नहीं है। महावीर की साधना होश की  साधना है जागरण की साधना है। जीवन एक भव्य जागरण है। जिन्होंने भी पाया है। जाग कर ही पाया है। जो भी पहुंचा है ।जाग कर ही पहुंचा है। जागरण ही जीवन है। मूर्छा से ऊपर उठे, निद्रा और तंद्रा टूटे तो प्रभु की पुकार सुनाई दे। प्रभु तुम्हें हर पल पुकार रहा है। वह पुकार जागरण की पुकार है। तीन ही पन है  जिसमें तुम जाग सकते हो। बचपन यौवन और बुढ़ापा और अगर इन तीनों पन  भी ना जागे,तो  तुम्हारा पागलपन ही सिद्ध होगा। आचार्य श्री के सानिध्य में भक्ति आराधना अभिषेक शांतिधारा आयोजित हुई इस मौके पर संजीव जैन नेता जी अनूप जैन सहित काफी तादाद में भक्तगण मौजूद रहे।

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