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Monday, January 25, 2021

आत्मा से कर्म का संबंध टेप रिकॉर्ड जैसा है। मुनि प्रसन्न सागर जी महाराज






आनंदपुरी स्थित जैन मंदिर में मुनि वचन में आचार्य प्रसन्न सागर एवं मुनि पीयूष सागर ने बताया कि जैन धर्म कहता है शुभ प्रवत्ति से शुभ और अशुभ प्रवृत्ति से अशुभ कार्य आते और बंधते हैं जैसा ही उनका फल मिलता है बाहर के टेप में एक सुविधा होती है कि कैसेट को आगे पीछे कर सकते हैं रिवर्स और फॉरवर्ड कर सकते हो जो अच्छा लगे उसे तुम बार-बार सुन सकते हो और जो अच्छा ना लगे उसे तुम आगे बढ़ा सकते हो उसे खाली भी कर सकते हो पर भीतर की टेप व्यवस्था एकदम भिन्न और अलग किस्म की है इसमें जो भी भरा जाएगा उसे भोगना ही पड़ेगा सुनना ही पड़ेगा गीत सुनने पड़ेंगे और गाली है तो गाली सुननी पड़ेगी तुम्हारी अपनी पसंद नहीं चलेगी कर्म सिद्धांत का दर्शन कोई आपके मनपसंद फिल्मी गीतों का कार्यक्रम थोड़ी ना है कि जो सुनना चाहो फरमाइश करो और सुनने को मिल जाए या तो नियति है जिसे हंसकर भोगो या रोकर भोगना ही पड़ता है बबूल के बीज बोकर आम आज तक किसने गाया है पाप के पथ पर चलकर आज तक जीवन में सुख किसने पाया है जगजाहिर है बुराई का फल बुराई और भलाई का फल भला ही होता है इस दौरान मुख्य रूप से डॉ अनूप जैन महेंद्र कटारिया त्रिभुवन अजय पटौदी संजय सोगानी अमित सौरभ अमित अनूप जैन सहित काफी तादाद में जैन श्रद्धालु सदस्य मौजूद रहे।

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