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Sunday, November 22, 2020

कानपुर : पैगंबर ने भेजा रिजवान को, हिंदू बहन के लिए





कभी-कभी हालात,किसी को भी घेर लिया करते हैं।




                                                       बीते दिनों भैया दूज के अवसर पर जहां बहने अपने भाइयों की दीर्घायु,सुख समृद्धि, स्वास्थ्य की कामना कर रही थी। वही मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट के  रिजवान अंसारी ने कानपुर के रुग्णालय में जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रही एक हिंदू बहन को प्लेटलेट्स दान कर मानवता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। रुग्णालय के चिकित्सकों ने बच्ची के माता-पिता को प्लेटलेट्स की व्यवस्था करने को कहा। चिकित्सकों ने कहा कि आपके बच्चों को जिस रक्त समूह के प्लेटलेट्स की आवश्यकता है।वह रक्त समूह अत्यंत ही विलक्षण श्रेणी में आता है। उसको सुनकर बच्ची के माता-पिता परेशान हो उठे। कभी किसी से कुछ ना मांगने वाले बच्ची के अभिभावकों ने अपनी व्यथा  अखिल भारतीय पीड़ित अभिभावक महासंघ एवं फलक एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य राकेश मिश्रा को बताई। मिश्रा ने अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए ,सूचना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विस्तार देने के साथ-साथ मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट के रिजवान अंसारी को भी बताया। अंसारी को जैसे ही पता चला वह अपने समस्त कार्यों को स्थगित कर, बहन की जीवन रक्षा के लिए रुग्णालय पहुंच कर जान बचाई एवं दीर्घायु होने की कामना की। बच्ची के अभिभावकों ने रिजवान अंसारी,राकेश मिश्रा का बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित किया। इस पर रिजवान अंसारी ने अपने दिल के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 'भाई बहन का रिश्ता भी कितना मुख्तसर और निराला है ,पर हमारे इस मुआश्रे ने अपने नफ्स को कैसे बेदार और नमूदार कर डाला है। इस पर बच्ची के अभिभावक ने प्रतिक्रिया में उत्तर देते हुए कहा कि रक्तदानी मौत को भी ढेर किया करते हैं, रक्तदान सा कर्म बस शेर किया करते हैं !मजबूर को देख नजर फेरने वाले सुन... कभी-कभी हालात किसी को भी घेर लिया करते हैं.



ऐसे में एक यक्ष प्रश्न यह बनता है कि प्रतिष्ठित, महंगे ,रसूखदार, स्टेटस सिंबल वाले अस्पताल को देखकर  रोगियों को भर्ती किया जाता है एवं जब यह अस्पताल रक्त की व्यवस्था कराने में असमर्थ हैं तो वह किस अच्छी सेवा का दाम मांगते हैं। रक्त दान देने के उपरांत अस्पताल प्रबंधन से रिजवान को मिला ₹20 का जूस का पैकेट और चार आरारोट के बिस्किट।प्लेटलेट्स दान देकर व दिलवाकर रिजवान और राकेश चले गए लेकिन प्लेटलेट्स दान देने के उपरांत रक्त से  बचे हुए अवयवों का क्या हुआ? क्या अस्पताल प्रबंधन ने बचे हुए रक्त को फेंक दिया या उससे और अतिरिक्त कमाई की। एक टावर से कई टावर यूं ही नहीं बनते।एक अनुत्तरित प्रश्न..…? ऊंची दुकान, फीके पकवान!

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