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Sunday, October 18, 2020

नवरात्र का पहला दिन है इसी नवरात्र की चतुर्थ देवी है मां कुष्मांडा






रिपोर्ट - शिवम् सविता




इसका एकमात्र मंदिर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले की घाटमपुर तहसील में स्थित है •हम आज नवरात्र के पावन दिनों में मां कुष्मांडा देवी के मंदिर का इतिहास लेकर आपके सामने आए हैं •जाने मां कुष्मांडा देवी मंदिर के बारे में •मां कुष्मांडा जो घाटमपुर क्षेत्र  में कूड़हा देवी के नाम से भी प्रसिद्ध है •आपको बता दें कुष्मांडा देवी को घाटमपुर में कुङ़हादेवी क्यों कहते हैं •जो कि बेहद रोचक है •हमने बात की मंदिर में पिछले 60 वर्ष से रहने वाले वह मंदिर की देखरेख करने वाले माली समाज के बुजुर्गों से तो उनके अनुसार उनके बुजुर्ग जो कभी मंदिर की सेवा में रहते थे •उनके अनुसार शुरुआत में जब यहां चारों तरफ जंगल हुआ करता था • यहां उस वक्त मुगलो का शासन खत्म हुआ था और अग्रेजी शाषन धीरे -२ अपनी जडे जमा रहा था। •इसी जंगल में कुछ खंडहर से पड़े हुए थे• इन्हीं खंडहर के पास बहुत से ग्रामीण अपनी गाय व अन्य जानवर चराने आते थे• उन्हीं ग्रामीणों में एक कुडहा नामक ग्रामीण भी अपनी गाय जानवर चराने के लिए यहां लेकर आता था •उसकी एक गाय इन्हीं खंडहरों के बीच एक जगह अपना सारा दूध गिरा देती थी• जब ग्रामीण कूड़हा अपनी गाय लेकर घर जाता और दूध निकालने बैठता तो देखता की गाय के थन में दूध है ही नहीं •इस वजह से वह परेशान हो जाता •उसको लगता कि दूध किसी ने निकाल लिया• कुछ दिन लगातार ऐसा होने पर उसने सोचा कि इसका पता लगाया जाए •उसने छुपकर गाय की निगरानी की• निगरानी में उसने देखा कि उसकी गाय एक नियत स्थान पर जाकर अपना सारा दूध गिरा देती है• तब उसने यह घटना लगातार दो-तीन दिन तक देखी और घटना साथी ग्रामीणों को बताया •जब सभी ने देखा तो 1 दिन सभी उस स्थान पर पहुंचे देखा कि वहां एक मठिया रूपी खंडहर पर एक लेटी हुई मूर्ति रखी है• वह समय था वह नवरात्र का और दिन था नवरात्र की चतुर्थी कुष्मांडा मां का •ग्रामीणों ने उसी दिन से उस लेटी हुई मूर्ति को कुष्मांडा का उद्गम दिन मानकर देवी की पूजा करने लगे• पर इन सब के बीच वह गाय जब तक दूध देती रही तब तक अपना पूरा दूध मां कुष्मांडा के ऊपर गिराती रही• जिससे मूर्ति पर ग्रामीणों को आस्था लगातार बढ़ती रही • मां के ऊपर पड़े हुए नीर से लोगों की आंखों की परेशानियां भी दूर हो जाती है •उनकी मनोकामनाएं मां कुष्मांडा के मंदिर में पूरी होती रही• धीरे-धीरे इस मूर्ति की चर्चा दूर-दूर तक पहुंचने लगी और ग्रामीण दूर-दूर से मां के दर्शन के लिए आने लगे •बाद में घटना की जानकारी राज्य के राजा घाटमदेव हुई तो वह भी दर्शन हेतु इस स्थान पर आए• उन्होंने यहां आकर जब यह चमत्कार देखा तो बहुत प्रभावित हुए• लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए उन्होंने इस स्थान पर जंगल वगैरह साफ करवा कर एक मंदिर का निर्माण कराया• जिसके बगल में एक तालाब का भी निर्माण उन्होंने कराया• जिससे ग्रामीण श्रद्धालु आराम से आकर मां के दर्शन कर सकें• इसके साथ ही विश्रामगृह या कुछ अन्य निर्माण कराएं• जिससे ग्रामीण काफी प्रसन्न हुए• वहीं ग्रामीण पास के गांव का नाम घाटमदेव महाराज के नाम पर घाटमपूरवा रखा गया •जो कि बाद में घाटमपुर हो गया• एवं मंदिर का नाम कूड़हा ग्रामीण के नाम पर कूडहा  देवी रखा गया• जो बाद में समय के साथ कुष्मांडा देवी के रूप में आस्था का केंद्र हो गया• आज लगभग 300 वर्ष में मंदिर का स्वरूप धीरे-धीरे पूर्णतया बदल गया है•इसके साथ ही मंदिर परिषद मे विभिन्न देवी मंदिर व शिव मंदिर का निर्माण हो गया• साथ ही नगर पालिका एवं माली समाज द्वारा इसका अत्यधिक विकास से मंदिर की अलग ही छटा नजर आती है• कुष्मांडा देवी का मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन आता है• इसलिए समय-समय पर पुरातत्व विभाग भी मंदिर में विकास कार्य करवाता रहता है• नवरात्र के पावन पर्व पर कोविड-19 संक्रमण चलते इस बार कुछ हद तक छूट दी गई है •इस  लिये नवरात्र मंदिर में माता के दर्शन अवश्य करें• मां आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें इन्हीं शुभकामनाओं के साथ "मां कुष्मांडा माता की जय"।

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