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Sunday, July 5, 2020

कानपुर : भोलेनाथ के एकमात्र दर्शन से सारे कलेश और द्वेश पल भर में ही समाप्त हो जाते हैं। यहां पर दर्शन करने के लिए देश और विदेशों से भी लोग आते है।



रिपोर्ट - शिवम् सविता
नेशनल आवाज



आनंदेश्वर मंदिर अपने आप में महाभारत काल का इतिहास समेटे हैं. मंदिर के महंत बताते हैं कि  "इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल के पहले का है। गंगा किनारे करीब तीन एकड़ में बना है यह मंदिर। प्राचीन समय में यहां पर एक विशाल टीला हुआ करता था। जिसके आस-पास उस समय के एक राजा की कई गाएं चरने के लिए आती थी। यहां पर महाभारत के कर्ण ने भी पूजा की थी. सिर्फ कर्ण को पता था कि यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग है. कर्ण गंगा में स्नानं करने के बाद गुपचुप तरीके से पूजा करते थे. इसके बाद अदृश्य हो जाते थे, लेकिन कर्ण को पूजा करते हुए यहां पर एक गाय ने देखा जो कि उन गायों में से एक गाय थी आनन्दी गाय। आनंदी गाय उस टीले पर जाकर बैठती थी और जब वहां से चलने लगाती थी तब वह अपना सारा दूध उस टीले पर ही देती थी। - जब राजा को इसके विषय में पता चला तो वह कई दिनों तक इसे देखता रहा, एकदिन राजा ने गाय के खुद ब खुद दूध बहा देने का रहस्य जानने के लिए टीले की खुदाई करवाई। कहते है दो दिन की खुदाई के बाद उस टीले से एक शिवलिंग निकला, भोलेनाथ का शिवलिंग देख राजा ने उस  शिवलिंग को गंगा जल और दूध से स्नान करा कर गंगा किनारे स्थापित किया. वहा शिवलिंग मिलने के बाद उस गाय ने भी वहां अपना दूध बहाना बंद कर दिया। ऐसे में उस गाय के नाम पर यहां मिले भोलेनाथ का नाम आनंदेश्वर रखा गया।"बदलते वक्त के साथ बाबा आनंदेश्वर का यह मंदिर भव्य बनता चला गया. इस मंदिर को भक्त छोटे काशी के नाम से भी पुकारते हैं. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव यहां पर स्वयं निवास करते हैं, यहां पर आने वाले भक्तों के भगवान के दर्शन मात्र से सभी दुःख दर्द मिट जाते हैं. यहां पर खासकर सावन के महीने में देश विदेश से लेकर बड़े-बड़े व्यापारी और आम जनमानस का समूह उमड़ता है।
इस पावन मास में रुद्राभिषेक, शिव पार्वती का पूजन, सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से अनंत पुण्य की प्राप्ति तो होगी ही भगवान शिव पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य भी प्रदान करेंगे।


शिव रात्रि और सावन पर पर्व पर यहां भक्त रुद्राभिषेक कराते हैं. यह मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां पर पूरे 365 दिन भंडारा चलता है. सावन के सोमवार को मंदिर लाखों की संख्या भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं ।

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