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Sunday, July 5, 2020

कानपुर : उत्तर प्रदेश अभिभावक संघ के अध्यक्ष राकेश मिश्रा ने सैकड़ों अभिभावकों के साथ मिलकर फीस माफी के लिए किया धरना प्रदर्शन



कल प्रमुख सचिव अराधना शुक्ला जी, के माध्य्म से एक आदेश जारी किया गया और *यह आदेश इस बात का प्रमाण है की हम सबकी मुहिम ठीक दिशा में जा रही है* जैसा की आपने देखा की स्कूल प्रशासन के दबाब में आकर प्रदेश सरकार द्वारा प्रमुख सचिव के माध्य्म से फीस जमा करने के आदेश निकलवाये जा रहे है, कल का आदेश भी पूर्व की तरह ही है औऱ इसमें *निजी स्कूलों को बुक्स स्टाल लगाने की अनुमति दी गई है* और आपदा प्रबंधन एक्ट का हवाला दिया गया है हालांकि यह फीस अधिनियंम 2018 के आदेशों का सरासर उंलग्न है। साथियों, आदेश में कही नही लिखा है की *स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचेंगे* हम सभी के पास जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा *सभी निजी स्कूलों को  NCERT किताब लगाने का आदेश है अतः जो भी अभिभावक जाये वो NCERT की किताबों की मांग करे जो कि जिला प्रशासन द्वारा हमें अधिकार दिया गया है* इस आदेश का पालन कराना हम अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है। साथियों, इस आदेश में नियमित वेतन पाने वाले , टैक्स देने वाले पेरेंट्स को फीस जमा करने का अनुरोध किया गया है मतलब लड़ाई *"सक्षम और अक्षम"* अभिभावकों की बनी हुई है। सरकार द्वारा लगातार पेरेंट्स को *"सक्षम"* माना जा रहा है जबकि परिस्थियों के हिसाब से हम वर्तमान स्थिति में *"अक्षम"* अभिभावक है साथियों, शायद आदेश देने वाले जिम्मेदार अधिकारी ये भूल गये की तीन महीने के लॉक डाउन  के कारण काम धंदे बन्द होने से जो समस्या अभिभावकों  के सामने खड़ी हुई है उसकी कल्पना भी नही की जा सकती फिर क्यों अभिभावकों को *"सक्षम"* औऱ *निजी स्कूल जिनके पास करोड़ो रुपयों का रिज़र्व-फंड है उनको "अक्षम" माना जा रहा है*। आप सभी भली-भाँति जानते है की इस समय में सभी की तनख्वाह कटी है, आधी मिली है या फिर बहुत लोगों की नौकरी भी छूट गई है खुद *देश के सबसे "सक्षम" आदरणीय प्रधानमंत्री जी, ने देश मे "लॉक डाउन" के कारण राहत कोष में जनता से "दान" की अपील की फिर प्रदेश के अभिभावक इस वैश्विक महामारी में "सक्षम" कैसे हो गए*। इस आदेश में यह लिखना बहुत हास्यपद दिखता है क्या प्रदेश सरकार पुर्णतया निजी स्कूलों के दबाब में कार्य कर रही है *पिछले तीन महीने में सरकार में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों या नेताओ द्वारा एक बार भी यह नही कहा गया की "सक्षम" निजी स्कूल फ़ीस माफ़ करें औऱ ना ही सरकार को करोड़ो रूपये का उन स्कूलों के पास रिज़र्व फंड दिखा* क्यों बार बार अभिभावकों को *"सक्षम"* मान प्रदेश सरकार द्वारा आदेश निकाल कर अभिभावकों के ऊपर दबाब बनाया जा रहा है। *यह मनोदशा निजी स्कूलों के "हितों" और अभिभावकों के "अहित" के इस दोहरे चरित्र को दर्शाता है* और साथ ही यह भी दिखाता है की *"पूंजीपति" निजी स्कूल मालिकों की पहुँच सरकार तक आम जनता एवं अभिभावकों के मुकाबलें ज्यादा है* औऱ सरकार ने भी कोई कसर नही छोड़ी है इन निजी स्कूलों का साथ देने की इस महामारी में,पिछले *तीन महीनों से जारी फ़ीस माफ़ी की अपील को सरकार द्वारा अनदेखी और मौन धारण रहना एवं स्कूलों का ही पक्ष लेना इसका जीत जागता उदाहरण है*। साथियों, आदेश में अभिभावकों को भी *फ़ीस न जमा कर पाने की स्तिथि में* स्कूल प्रशासन को पत्र द्वारा सूचित करना है जो हम सभी कारणों सहित पूर्व की तरह बिना विचलित हुये लिख सकते है और साथ ही आदेश में लिखा गया है कि आप इसकी शिकायत *जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) , में कर सकते है जिसका निस्तारण DFRC को एक हफ्ते में करना होगा।* साथियों, आदेश में एक सबसे अच्छी चीज यह लिखी है कि *अभिभावकों द्वारा फीस जमा न करने के स्थिति में किसी भी बच्चें का नाम नही काटा जायेगा और ना ही बच्चें की ऑन-लाइन क्लास बाधित की जाएगी जोकि अभिभावकों के लिये सबसे महत्वपूर्ण और अहम है औऱ शायद सरकार द्वारा भूलवश अभिभावकों को लड़ने के लिए एक अहम हथियार दे दिया गया है।* साथियों,आप सभी से निवेदन है की विचलित ना हो  और सही और गलत का निर्णय करे और अपनी परिस्थियों का आंकलन करते हुये एक साथ सगठित होकर निर्णय ले क्योंकि सघर्ष ही जीत का मूलमंत्र है औऱ संगठित होकर ही विजय प्राप्त की जा सकती है। हम सभी निश्चित ही इस मुहीम में विजय प्राप्त करेंगे । अभिभावक ऐकता जिन्दाबाद


धन्यवाद

सौजन्य से
फलक चैरिटेबल एंड एजुकेशनल ट्रस्ट 9839940989

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