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Friday, July 10, 2020

कानपुर : रहस्यों से भरा है देश का इकलौता ईटों का मंदिर



कानपुर से करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित भीतरगांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर पांचवी सदी का ईटों का बना गुप्त कालीन मंदिर अद्भुद प्राचीन कलाकृति का अनूठा नमूना है। लेकिन इस मंदिर ने अपने अंदर कई अनसुलझे रहस्य भी छिपा रखे हैं। गांव के अजय सिंह ने बताया कि वे तीसरी पीढ़ी से हैं, लेकिन मंदिर के अंदर कभी नहीं गए। अजय के साथ ही इस गांव के अन्य किसान, मजदूर, ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के अन्दर कौन से भगवान की मूर्ति है और वह कैसी है यह कोई नहीं जानता। गांव के निवासियों के मुताबिक मंदिर के बारे में बुजुर्ग बताते थे कि मंदिर के नीचे चंद्रगुप्त शासन काल के दौरान का खजाना छिपा है और इसकी सुरक्षा इंसान नहीं, बल्कि आत्माएं करती हैं। अजय सिंह ने बताया कि मंदिर के पास एक तालाब से गांव वाले मिट्टी खोद रहे थे, तब उन्हें सोने की ईटें मिली थीं। इसी के बाद मंदिर के नीचे दबे खजाने की पुष्टि हुई थी।

*चंद्रगुप्त मौर्य ने कराया था मंदिर का निर्माण*

गांव के निवासियों ने बताया कि अपने बुजुर्गो से सुना है कि इस मंदिर का निर्माण चन्द्रगुप्त मोर्य ने कराया था। पूरा मंदिर ईटों से बना हुआ है। पिरामिड आकार के इस मंदिर की ऊंचाई 20 मीटर और चौड़ाई 70 मीटर है। मंदिर पर तराशी कई मुर्तियां व नक्काशी प्राचीन कलाकृति को दर्शाती हैं। अजय के मुताबिक इस मंदिर में कभी पूजा नही हुई है। मंदिर में एक विष्णु जी के बावन अवतार वाली मूर्ति है, एक मूर्ति चार भुजाओं वाली दुर्गा जी की और गणेश भगवान की चार भुजाआें वाली मूर्ति है। अजय बताते हैं कि लोग मंदिर के अंदर तब जाते थे जब सूर्य की रोशनी होती थी और अंधेरा होने पर यहां पर जानवर भी जाने से कतराते हैं। इस मंदिर का मुख पूर्व की तरफ है जब सूर्य निकलता है तो पहली किरण मंदिर पर पड़ती है, जिसका प्राचीन समय में कुछ महत्व रहा होगा। वास्तु के हिसाब से ही मंदिर का निर्माण कराया गया होगा। इस मंदिर की खास बात यह है कि इसको किसी भी दिशा से देखो तो यह एकसमान ही दिखता है।

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