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Monday, November 11, 2019

श्रद्धांजलि पर याद किए गए भारत के पहले शिक्षा मंत्री अब्दुल कलाम आजाद।


रिपोर्ट- मंगल सिंह तोमर

जिनमें भारत की आजादी का ऐसा जुनून कि अपना नाम अबुल कलाम गुलाम मुहीउद्दीन से बदल कर अबुल कलाम 'आजाद' कर लिया और जिन्होने मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान के सिद्धांतों का विरोध कर हिन्दू - मुस्लिम एकता का जोरदार समर्थन किया। भारत के ऐसे महान सपूत, स्वाधीनता के अमर सेनानी, भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद के चरणों में हम कांग्रेस के लोग अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर गौरवान्वित महसूस करते हैं। यह विचार महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर प्रकाश अग्निहोत्री ने आज तिलक हाल में आयोजित मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर पुष्पांजलि सभा में व्यक्त किए। हर प्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के वसूलों और सिद्धांतों पर आजीवन चलने वाले मौलाना आजाद स्वाधीनता संग्राम के उन अग्रणी नेताओ में से थे। जिन्होंने 1905 में बंगाल विभाजन का जोरदार विरोध किया था। और आल इंडिया मुस्लिम लीग की विभाजनकारी नीति के विरोध में देश भर में अभियान चलाया था। उन्होंने ने कहा कि उनकी इस्लामी शिक्षा का आलम यह था कि आमतौर पर जो शिक्षा 25 साल की उम्र में हासिल की जाती है। उसे महज 16 साल की उम्र में ही हासिल कर इतिहास, दर्शन, गणित, फारसी, उर्दू, हिन्दी, बंगाली, अरबी और अंग्रेजी दुनियां के चोटी के विद्वानो की कतार में खड़े नजर आने लगे. मौलाना आजाद के देश के प्रति महान योगदान को कभी भुलाया नहीं जा। प्रमुख रूप से शंकर दत्त मिश्र, इकबाल अहमद, अशोक धानविक, निजामुद्दीन खा, अतहर नईम, रिजवान हामिद, अब्दुल मन्नान, मदन मोहन शुक्ला, ग्रीन बाबु सोनकर, लल्लन अवस्थी, चन्द्रमनी मिश्र, सुबोध बाजपेई, रामनारायण जैस, जफर शाकिर मुन्ना, आनंद स्वरूप कपिल, सुरेश अग्रहरि, काजी अजीज उल्ला, मुन्ना आदि शामिल थे।

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