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Saturday, September 7, 2019

धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस,अध्यापक प्रवीण कुमार को किया गया सम्मानित।


रिपोर्ट- शिवम सविता

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, क्योंकि माता-पिता ही हमें इस खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जीवन के सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। देश में पुराने समय से ही गुरु व शिक्षा परंपरा चली आ रही है, लेकिन जीने का असली मकसद हमें गुरु ही सिखाते हैं व सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। और हमे सही रास्ता दिखाते हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत भर में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। इस समाज में गुरु का अपना एक विशिष्ट स्थान होता है। डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में बहुत रुचि रखते थे। वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उन्हें अध्यापन से गहरा लगाव था। उनमे एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण विद्यमान थे। शिक्षक उस मोमबत्ती की भांति होता है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में तहसील नर्वल के ह्र्दयखेड़ा निवासी अध्यापक प्रवीण कुमार को छात्रों ने सम्मानित किया। अध्यापक प्रवीण कुमार ने छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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