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Tuesday, August 14, 2018

धर्मपाल सिंह ने बैठक कर की सिचाई विभाग की समीक्षा - JST NEWS INDIA

कानपुर प्रदेश के सिचाई मंत्री श्री धर्मपाल सिंह सर्किट हाउस में सिचाई विभाग के कार्यों की समीक्षा की। पत्रकार वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष वर्षा बहुत अच्छी हो रही है, जिसके चलते 40 जनपदों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अभी तक प्रदेश के सभी तट बंध सुरक्षित हैं ।राहत कार्यों पर भी नज़र रखी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि लापरवाही बरतने के कारण अब तक 36 अभियन्ताओं को निलंबित एवं 105 के विरुद्ध कठोर विभागीय करवाई की गई। कई वर्षों से लंबित प्रदेश की 04 बड़ी परियोजनायों क्रमशः 1-मध्य गंगा परियोजना,2-सरयू नहर परियोजना,3-अर्जुन सहायक परियोजना का कार्य 2019 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।बाण सागर परियोजना का लोकार्पण किया जा चुका है।यह परियोजना मिर्जापुर-बिंध्याचल क्षेत्र में है।इसके शुरू होने से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के किसानों एवं आमजन को लाभ मिला है ।सरयू नहर परियोजना पूर्ण होने पर पूर्वांचल के जनपदों में बाढ़ से निजात मिलेगी।अर्जुन सहायक परियोजना बुंदेलखंड के लिए है। इसके चालू होने से बुदेलखण्ड के किसानों की समस्या हल होगी। बुंदेलखंड के लिए बेतवा-केन लिंक एवं मध्य प्रदेश सरकार से समझौता मील का पत्थर साबित होगा। 

सिचाई मंत्री ने आगे बताया कि प्रदेश में"नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवित सेल " का गठन किया गया है। प्रथम चरण में प्रदेश की 08 नदियों क्रमशः एरिल,गोमती,सोद, तमसा, मनोरमा, आमी,वरुणा एवं सई को लिया गया है। नदियों के तटीय क्षेत्रों में अतिक्रमण के लिए उन्होंने सिचाई विभाग को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। तटीय क्षेत्रों में प्रभावशाली /दबंगों  के विरुद्ध कठोर कार्यवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा।

सिल्ट -सफाई एवं टेल तक पानी पहुँचने के संबंध में सिचाई मंत्री ने बताया कि 03 प्रकार की समितियों क्रमशः रजवाहा समिति, कुलावा समित एवम अलपिका समित का गठन किया गया है। ड्रोन कैमरे से सिल्ट की साफ सफाई का निरीक्षण कर जिलाधिकारी की संस्तुति के पश्चात भुगतान किया जाएगा । उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री जी के नारे  "one drop, more crop " पर लघु/ सीमांत कृषकों को 90% बड़े कृषकों को 80% अनुदान देने की कार्यवाही प्रगति पर है। प्रदेश के पठारी क्षेत्रों में कृतिम वर्षा कराने पर कार्य चल रहा है। रु0 05 करोड़ में 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में वर्षा कराई जा सकेगी। गंगा नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहें हैं।


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