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Tuesday, June 12, 2018

बाल श्रम देश के लिए गंभीर समस्या : अधिवक्ता जितेंद्र चौहान - UP SANDESH

कानपुर देहात 12 जून 2018 (अमित राजपूत) बाल श्रम एक प्रमुख सामाजिक आर्थिक समस्या है जो बालक की शारीरिक-मानसिक क्षमता को प्रभावित करता है, यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि यह बालक के कार्य करने, विचार एवं अनुभव करने, दृष्टिकोण निर्मित करने आदि की अवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह बात सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसोसिएशन प्रताप सिंह चौहान ने  विश्व बाल श्रम निषेध दिवश के अवसर पर'बल श्रम कारण और निवारण परिचर्चा चौपाल 'पर  सिविल बार एसोसिएशन व जिला बार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में जिला मुख्यालय के बाहर आयोजित  कही,जितेंद चौहान ने कहा कि, देश में इस सम्बंध मेंअन्य कानूनों के अलावा भारतीय संविधान में बाल श्रम पर रोक लगाई गई है अनुच्छेद 24 में प्रावधान किया गया है कि चौदह वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने  या खदान या अन्य किसी खतरनाक रोजगार में नियोजित नहीं किया जाएगा,तथा अनुच्छेद 39 (एफ) में प्रावधान है कि राज्य ऐसी सुविधाओं एवं अवसरों की व्यवस्था करेगा जिससे बच्चे स्वतंत्रता एवं सम्मान के साथ तथा स्वस्थ  तरीके से विकसित हों तथा उनका बचपन एवं जवानी शोषण व नैतिक तथा भौतिक परित्याग से सुरक्षित हो ।  अनुच्छेद 45 में प्रावधान है कि राज्य भारतीय संविधान लागू होने के दस वर्षों के अंदर 14 वर्ष की उम्र तक के बच्चों को मुक्त एवं अनिवार्य शिक्षा देने की कोशिश करेगा। कहा कि बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के पश्चात उनके पुनर्वास की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । अन्यथा बाल श्रमिक आजीविका के साधनों से वंचित रहकर असमाजिक कार्यों की ओर उन्मुख होकर अनेक समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। पारंपरिक व्यवसाय को बढावा देने के लिए व्यवसाय में लगे छोटे सदस्यों को प्रशिक्षण एवं स्थानीय ग्रामीण बैंकों को त्रऽण दिलवा कर उनकी स्थिति मजबूत करनी चाहिए,जितेंद्र ने बाल श्रम पुनर्वास में विधिक सेवा प्राधिकरण की सक्षम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राधिकरण को इस दिशा में अपनी सक्षम भूमिका अनवरत निभाते रहने से ही वास्तव में सुधार सम्भव होगा ।जिला बार एसोसिएशन के महामन्त्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सरकारी व जिम्मेदार स्तर पर इस तरह के दिवस मनाने मात्र औपचारिकता रह गयीं है,इसे वास्तव में कारगर रूप से लागू न करने से लोगो मे कानूनों  के प्रति निराशा का भाव विकसित होता है,उन्होंने कहा कि यदि कोई क़ानून का उल्लंघन होते हुए दखे तो इसकी शिकायत पुलिस या मजिस्ट्रेट से कर सकता हैं या बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं की नज़र में भी यह ला सकता हैं जो मुद्दे को आगे तक ले जा सकते हैं, पुलिस अधिकारी या बाल मज़दूर इंस्पेक्टर भी शिकायत की जा सकती है। प्रमुख रुप से जयप्रकाश, धीरेंद्र यादव, जय सिंह, पंकज कुमार ,सुभाष यादव, अनुराग ,विश्वनाथ सिंह, राहुल यादव रहे

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