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Monday, April 30, 2018

देश के पंचायती राज का सपना अटक गया है: अधिवक्ता जितेंद्र चौहान

कानपुर देहात 30 अप्रैल 2018 (अमित राजपूत) स्वशासन के लिए बनी किसी भी संस्था की सफलता के लिए पहली शर्त तो यही है कि उसमें सत्ता सीधे लोगों के हाथ में होनी चाहिए न कि चुने हुए कुछ लोगों के हाथ में और गांवों में बसने वाले भारत की समस्याओं का समाधान गांधी परिकल्पित ‘ग्राम-स्वराज्य’ को मूर्त करके ही हो सकता है। यह बात कानपुर देहात के बिलासपुर सिकन्दरा तहसील में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में मुख्य अतिथि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने कही। महात्मा गांधी अपनी ‘स्वराज’ या ‘स्वराज्य’ संबंधी अवधारणा को जीवनपर्यंत परिभाषित करते रहे। हिंदुस्तान के संदर्भ में उन्होंने जिस स्वराज की परिकल्पना की थी। उसके केंद्र में थी गांवों की स्वायत्त, स्वावलंबी अर्थ एवं प्रबंधन सत्ता रही। हमारे देश का पंचायती राज का सपना अटक गया है, कहने को पंचायत को हम केन्द्र व राज्य के बाद तीसरे स्तर की सरकार कहते हैं लेकिन इस सरकार के एक भी कर्मचारी पर उसका नियंत्रण नहीं है। सभा के दौरान लोगों ने सवाल उठाये कि क्या है। आम लोगों की सभा में फैसले लिए जा सकते है, तो जितेन्द्र ने कहा हाँ  बिल्कुल लिए जा सकते हैं, बशर्ते कि इस तरह की बैठक कराने के लिए कानून ठीक तरह से बनाए जायें बताया कि स्विटज़रलैंड, ब्राज़ील और अमेरिका में आज स्थानीय लोग अपनी स्थानीय स्तर की व्यवस्था इसी तरह चलाते हैं। यहां तक कि प्राचीन भारत में इसी तरह की व्यवस्था रहती थी।शिविर में बतौर विशिष्ठ अतिथि पहुँची सिकन्दरा तहसीलदार दीपाली कौसिक ने मानवाधिकार पर कहा कि प्राकृतिक अधिकार जो मानव को जन्म लेते ही प्राप्त होता है उसे मानव अधिकार कहते है इसमे भोजन वस्त्र, आवास आदि मनवाधिकार में आम लोगों को बेहतर और सुरक्षित जीवन के लिए कुछ मूलभूत अधिकार दिए गए हैं। जिसे देने के लिए शासन प्रशासन कटिबद्ध है। उपजिलाधिकारी दीपाली कौसिक के समक्ष भारी संख्या में ग्रामीणो ने शिकायत कि गांव पंचायत स्तर पर बिना अधिकांस कार्य हुए कूटरचित बिलो के आधार पर जहाँ एक ओर एक ही काम के लिए सरकारी निधि से धन का आचरण हुआ है। वहीं गॉंव सड़क खरंजा, नांली शीवर, तालाब सुंदरीकरण, स्कूल, खेलकूद, मैदान, शिक्षा , सफाई, बिजली आदि मूलभूत आवश्यकताओं की दरकार में है। इस पर उपजिलाधिकारी ने त्वरित रूप से जाँच टीम गठित कर अति शीघ्र कार्यवाही की बात कही। शिविर के आयोजक R.T.I व मानवाधिकार कार्यकर्ता नोयडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एल० एल० एम० छात्र मेघराज सिंह ने गाँवों की समस्या रखते हुए कहा कि इसके पीछे अशिक्षा मुख्य कारण है। मेघराज ने कहा कि हमें यह तय करने का अधिकार है की हमारे बच्चे को किस तरह की शिक्षा मिले। हर बच्चे को जीने का अधिकार है, उसे शिक्षा मिले। यदि हमें हमारा हक़ दिलाने में सरकारी महकमा हमारी मदद नहीं कर रहा है तो हम मानव अधिकार आयोग में शिकायत कर सकते हैं। मानवाधिकार का उद्देश्य नौकरशाही पर रोक लगाना, मानव अधिकारों के हनन को रोकना तथा लोक सेवक द्वारा उनका शोषण करने में अंकुश लगाना और इसके लिए सूचना के अधिकार का इस्तेमाल हथियार के रूप में करने पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहबलाल राजपूत ने व संचालन सिकन्दरा तहसील सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जनमेजय सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से महेन्द्र पाल सिंह, ब्रजकिशोर राजपूत, विनोद कटियार, उदयभान सिंह राजपूत, आशीष राजपूत, पवन, शिवदीप, सजंय सिंह, ब्रजेश कुमार, शिवम शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे।

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