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Friday, March 23, 2018

सिविल बार एसोसिएशन के तत्वाधान में शहीद दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा



कानपुर देहात- 23 मार्च 2018
                                     हमारे लिए यह शर्म की बात है कि अब तक हमने अधिकृत रुप से भगत सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिया है. यह बात सिविल बार एसोसिएशन के तत्वावधान में राजेंद्रा चौराहा फत्तेपुर रोशनाई ,में शहीद भगत सिंह राजगुरु व सुखदेव के शाहिद दिवस पर  आयोजित  श्रद्धांजली सभा में सिविल बार एसोसिएशन के अध्य्क्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा, कि न सिर्फ, भगत सिंह को बल्कि उनके साथ हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले सुखदेव और राजगुरु को भी शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए इस अवसर मौजूद जितेन्द्र चौहान व जिला बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित महामन्त्री मुलायम सिंह यादव ने भगत सिंह द्वारा अपने जीवन के आखिरी खत में लिखी इन बातों कि, "साथियों स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए. मैं इसे छिपाना नहीं चाहता हूं, लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैंद होकर या पाबंद होकर न रहूं. मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रांति  का प्रतीक बन चुका है. क्रांतिकारी दलों के आदर्शों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है, इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा नहीं हो सकता था. मेरे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने की सूरत में देश की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह की उम्मीद करेंगी. इससे आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा. आजकल मुझे खुद पर बहुत गर्व है.अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है. कामना है कि यह और नजदीक हो जाए।" आज देश के हर युवा ही नही बल्कि हर आयु जाती,धर्म के लोगो को अपने जेहन में रखनी।वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश चन्द्र सिंह गौर व एकीकृत बार के पूर्व मन्त्री शैलेन्द्र सिंह गौर ने कहा कि आज देश जाति धर्म,सम्प्रदाय के विद्वेष से जल रहे ज्वालामुखी के उस मुहाने पर खडा है जहाँ एक छोटी सी भूल देश को तबाह कर सकती है और इसमें सब से ज्यादा दोष देश की निरंकुश राजनैतिक ब्यवस्था का है जो शहीदों की कुर्बानी को जाया कर रही है।साधन सहकारी समिति फत्तेपुर रोशनाई साधन सहकारी संघ अध्यक्ष राघव सिंह सेंगर व प्रधानाध्यापक देवेन्द्र सिंह उर्फ आनन्द सिंह ने भगत सिंह के इस सन्देश को कि, "मैं यह मानकर चल रहा हूं कि आप वास्तव में ऐसा ही चाहते हैं. अब आप सिर्फ अपने बारे में सोचना बंद करें, व्यक्तिगत आराम के सपने को छोड़ दें, हमें इंच-इंच आगे बढ़ना होगा.इसके लिए साहस, दृढ़ता और मजबूत संकल्प चाहिए.कोई भी मुश्किल आपको रास्ते से डिगाए नहीं. किसी विश्वासघात से दिल न टूटे. पीड़ा और बलिदान से गुजरकर आपको विजय प्राप्त होगी. ये व्यक्तिगत जीत क्रांति की बहुमूल्य संपदा बनेंगी।" आज के राजनैतिक व लोकतांत्रिक परिवेश में हर क्षण मनन करते हुए अपने जीवन मे शामिल करना होगा।इस अवसर पर देश की आंतरिक व वह्य सुरक्षा में लगे जवानों की आये दिन हो रही सहादत को याद करते हुए मोम दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सभी ने एक स्वर से देश के राजनैतिक ,धार्मिक व प्रशासनिक जिम्मेदारों को इस ओर अपनी सकारात्मक सोंच विकसित करने की ओर ध्यान देने की बात कही।प्रमुख रूप से हरिओम चौरसिया,विजय कमल,इंद्रवीर सिंह,सुरेन्द्र सिंह,रामदुलारे व मनोज कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।

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